कस्तूरी हिरण जैसे अपनी खुशबू में पागल झूमता है,
मैं घूमता हूं, मैं घूमता हूं, मैं घूमता हूं।
हमारे आवास के नीचे सोसाइटी का छोटा सा पार्क बना है। शाम होते ही उधर कुछ औरतें बैठके बातें करती हैं, कभी गाने गाती हैं, और कभी शांति से अपने नाती पोतों को देखती हैं। पार्क के इर्द गिर्द बच्चे तिल के दाने जैसे बिखरे रहते हैं। कोई साइकिल चलाता है, कोई बच्चों वाला स्कूटर, कोई छुपा छिपी खेलता है, इत्यादि। क्योंकि ये बच्चे भागते रहते हैं, उनकी आवाज की गूंज अचानक से आती है और फिर अचानक सब शांत होता है। हवा के झोंको जैसी वो आवाजें आती हैं फिर जाती हैं। पर पिछले सप्ताह, पार्क में बहुत से झूले लगा दिए हैं। कोई ऊपर नीचे होने वाला see-saw, कोई जवानों की तरह कसरत करने वाला लोहे का पुतला, और गिनती के दो रस्सी के झूले (swing)। नाना प्रकार के इन झूलों में स्विंग ही सबका खास है। इस पर बैठने का मजा होता भी अलग है। इसको आप अकेले में भी खेल सकते हैं, दोस्तों के साथ भी, और उम्र का खास कोई लेना देना इस झूले के साथ नहीं।
ये झूला लेकिन अब जलेबी के आखिरी टुकड़े जैसा हो गया है, जिसके आगे पीछे सब मक्खियों की तरह भिनभिनाते हैं। सबको उसका रस चाहिए और ज्यादा से ज्यादा भी चाहिए। अब झूले के इर्द गिर्द हमेशा भीड़ लगी रहती है। नंबर आता है। समय नोट किया जाता है। चिल्लम चिल्ली होती है। और बच्चों के हंसी के ठहाके अब हवा के झोंको जैसे नहीं, बल्कि अपनी ही बगिया में लगे फूल की महक जैसे हैं। हाल ये है की अभी रात के दस बजे भी झूले के हिलने की आवाज आ रही है।
झूले से मुझे हमारे समय में प्रचलित साइबर कैफे याद आ गए। कैसे तब इंटरनेट जिसकी स्पीड भी खास नहीं होती थी, उसके लिए रजिस्टर में नाम लिखवाना पड़ता था, दस रुपए आधे घंटे कंप्यूटर में काम करने के लिए लगते थे, और उस आधे घंटे में ऐसा लगता था ना जाने क्या क्या सुन लिया, देख लिया, पढ़ लिया आदि। महत्व बहुत था उस आधे घंटे का, क्योंकि नाप तोल के मिलता था समय। आज और हाल देखिए मैं लिख रही हूं इंटरनेट की मदद से, सब पढ़ेंगे उसी के माध्यम से, और घंटों बीत जाते हैं इसी इंटरनेट पर समय बिताते, पर फिर भी लगता है, पता भी नहीं चला क्या किया और क्या नया देखा पढ़ा।
नीचे पार्क में भी अभी जितने बच्चे हैं उतने झूले लगा देंगे तो शायद सारे ही झूले धूल खाने लगेंगे। पर अभी बस दो हैं, इसलिए मां बाप का हाथ पकड़े, अभी रात के दस बजे भी पार्क को जाते बच्चे दिख रहे हैं।
मन के मीत मेरे मिल जा जल्दी
दुनिया के सागर में नाव मेरी चल दी
बिलकुल अकेली, बिलकुल अकेली अकेली चली रे
चली रे चली रे मेरी नाव चली रे
न जाने किधर आज मेरी नाव चली रे
चली रे चली रे मेरी नाव चली रे