सफल और असफल दो विलोम शब्द हैं। इनका अर्थ आप देखें तो एक दूसरे से परे लगेंगे। किंतु ये शब्द भावनाओं की तरह हैं, जिनकी किन्ही दो व्यक्तियों के लिए समान परिभाषा नहीं। फ़लाँ इंसान को किसी का जीवन सफल लगता है और फ़लाँ को किसी और तरह का। अक्सर हम एक बड़ा घर, बड़ी गाड़ी, पैसा, रुतबा इन्हें सफल मानते हैं। मुझे याद है बचपन में एक बार हम ६-७ बच्चे एक दूसरे से सवाल कर रहे थे कि तुझे बड़े होके क्या बनना है। ये सवाल सफलता का आँकलन करने के लिए बहुत बार बच्चों से पूछते हुए आपको कई लोग देखे होंगे। हम सबने वही बड़ों से सुने हुए जवाब दिये, जैसे की “डॉक्टर, इंजीनियर, टीचर, लॉयर, इत्यादि”। मेरी दीदी ने तो प्रधानमंत्री बोला था। हम में से लेकिन एक थी जिसने कहा “हाउसवाइफ, मतलब गृहणी”। ये सुन हम सबके हंसते हंसते पेट में बल पड़ गए। लाज़मी है की गृहणी बनना हम सब बच्चों की नज़र में एक असफल कार्य था। मज़े की बात ये थी की जहां हम सभी की माँ गृहणी थी, वहाँ केवल उस एक लड़की की माँ टीचर थी। आज समय के साथ मुझे समझ आ गया है कि कोई जीवन पूर्णतः ना ही सफल है और ना ही असफल। यह बात महिलाओं के जीवन में बहुत ज़्यादा सोचने लायक़ है, क्योंकि समाज रूपी जौहरी सबसे ज़्यादा महिलाओं को ही हर पहलू में परखता है।
इसी संदर्भ में मैंने अपने आस पास की कुछ महिलाओं से पूछा की उनकी नज़र में सफल महिला कौन है । जवाब कहीं हद तक एक से थे पर फिर भी एक दूसरे से परे । मेरी बहन के दृष्टिकोण से एक सफल महिला वो है जो नौकरी भी करे लेकिन उसका अपना परिवार भी हो जिसमें बच्चों का होना भी शामिल हो । मेरी सास ने माँ होना ही औरत की सफलता का पैमाना रखा । मेरी कामवाली बाई ने मेरी बहन से इत्तेफाक रखा और मेरी दूसरी बाई ने नौकरी करना और साथ में कुँवारी रहना सफल औरत की पहचान बताई । मेरे प्रश्न से वैसे सब ही हैरान थे और किसी ने भी ज़्यादा वक्त देकर और बहुत सोचकर जवाब नहीं दिया । पर ये बात थी की सफलता एक निजी बात है । ख़ुद को दूसरे की उपलब्धियां और जीने के तरीके में ढालने की होड़ में कभी कभी एक सफल जीवन भी असफल लगने लगता है ।
मेरी नज़र में एक सफल महिला वो है जो जीवन अपने सिद्धांतों से जीये। अपनी जिंदगी के फैसले लेने का हक़ उसे हो और उन फैसलों के अंजाम का नतीजा भी वो निभाये। फिर चाहे वो अच्छा हों या बुरा। क्यूंकि ये ज़िन्दगी भी उसी की है।