रात के १२:३० बज रहे हैं। घर में शांति है। सब सो रहे हैं। इस वक्त किसी के पास और … More
Tag: समाज
जज़्बा-ए-ख़ुद्दार
जितनी बड़ी इमारत हो, उतनी ही बड़ी उसमें रहने वालों की चिंताएँ होती जाती हैं। समाज में असमानता की खाई … More
ये हाथ क्या सच में धुल पाएंगे!
साबुन की टिक्की खत्म हो चुकी है,पर न जाने फिर भी क्यों ये हाथ साफ नहीं होते।लगता है ये हाथ … More
हम तो डूबेंगे सनम, तुम्हें भी ले डूबेंगे
अगर आप उत्तर भारत में रहते हैं तो इस समय आपके पास बातें करने का सबसे प्रचलित मुद्दा होगा प्रदूषण। … More
रात थोड़ी लम्बी चलेगी
बीते दिनों कुछ ऐसी घटनाएं घटित हुईं,कि मेरी आत्मा मेरे समक्ष हर पल सवालों की लड़ियाँ बिछाती गयी। सवाल बहुत … More
ये वक़्त भी गुजर जाएगा
आज ट्रैन से सफर कर रही हूं।घर जाना है।माँ बब्बा की तबीयत कुछ नासाज है।मुझे गति के विपरीत दिशा वाली … More
नए समाज का नया मंत्र
पुराने समय में जब शिक्षा का दौर एवं लहर कम थी, प्रायः गुरु की महत्ता बहुत थी। गुरु से मेरा … More