पहाड़ी नूण

उत्तराखंड में कई खास प्रकार के व्यंजन बनते हैं। जहां जाड़ों में यहां दिन में रस-भात जिसको कुछ लोग ठठवाणी भी बोलते हैं, बड़े चाव से बनाई जाती है वहीं रात के दिनों में आलू का थेचुआ ठंड से राहत दिलाता है। पर कई बार ऐसा होता है ना कि इतना सब बनाने की इच्छा ना हो और रोटी में बस घी नमक लगा कर खा लें? ऐसा मन हो तो उसको भी कैसे लज़ीज़ बनाना है ये पहाड़ियों को भलि भांति आता है। ऐसी स्थिति का सही इलाज है घर में ही सिल-बट्टे पर पिसे तरह-तरह के नमक। आप चाहे पहाड़ के किसी गांव में घूमें या चाहे दिल्ली, बैंगलोर इत्यादि जैसे महानगरों में, हर पहाड़ी के घर आपको सिल-बट्टा जरूर मिलेगा। पिसे हुए नमक जिसको यहां पहाड़ी नूण कहा जाता है, तरह तरह के स्वादों में बनता है। सामग्री भी तरह तरह की इस्तेमाल करी जाती है। ऐसे ही कुछ पहाड़ी नूण के बारे में आपको आज ज्ञात कराने की सोची है। हो सके तो कभी खुद पीस कर खाइये। मज़ा आ जाएगा।

हरा नमक: सबसे लोकप्रिय पिसा हुआ पहाड़ी नमक कोई है तो वो है हरा नमक। नाम से ही प्रतीत होता है कि ये हरा धनिया से बनता है। हरा धनिया, हरी मिर्च और नमक मिला कर पीस दें। बेहतरीन नमक तैयार है।

लहसुन का नमक: एक पूरी गांठ लहसुन की, 7-8 लाल मिर्ची और 3-4 चम्मच सादा नमक। बस इन्हें पीस लीजिए। मंत्रमुग्ध होने की परिभाषा ही ना बदल दें कहीं आप।

अलसी का नमक: अलसी जिसे अंग्रेज़ी में flax seeds या linseed bhi कहते हैं अनेक गुणों से भरपूर है। स्वास्थ संबंधी गुण तो अनेक हैं ही, पर इसका स्वादिष्ट नमक भी किसी गुण से कम नहीं। अलसी के बीज हल्के भून कर नमक के साथ सिल में पीस लीजिए। फिर खाएये इसे रोटी के साथ। मज़ा आ जाएगा।

भांग का नमक: इससे पहले की आप मुझे नशा की लत लगा हुआ व्यक्ति समझें, कृपया करके समझ लें कि भांग के पत्तों से चरस बनती है जो कि गैर कानूनी है। किन्तु भांग के बीज नशा नहीं करते और बाकायदा गरम तासीर के बीज होते हैं। भांग के बीज को हल्का भून लें और ,5-6 हरी मिर्च के साथ 3-4 चम्मच नमक पीस लें। भांग को सही भूनने में ही इस नमक का पूरा परिचय है, ज्यादा भूनी तो बीज जल जाएगा और नमक कड़वा हो जाएगा, कम भूनी तो दो दिन में बीज अपना तेल छोड़ देगा और नमक “पतपतैन” हो जाएगा। इस नमक को खास पहाड़ी नींबू को सान कर उसमें डाला जाता है। ज्यादा लिखना सही नहीं होगा क्योंकि नींबू सानना सुनकर एक अलग ही अनुभूति होती है जो कि हर पहाड़ी समझ सकता है।

तिमुर का नमक: तिमुर पहाड़ों में कंटीली झाड़ियों में होने वाले छोटे बीज होते हैं। इनका अनेक तरीकों की जड़ी बूटियों में इस्तेमाल किया जाता है। यदि तिमुर की लाठी को लेकर लोग चलें तो उससे गठिया का रोग दूर होता है। झुखाम खांसी में भी इसके बीज चूसते रहने से बहुत राहत मिलती है। तिमुर का बीज आपकी ज़बान को पूरा झन्ना देता है। पर फिर भी आपको इसका नमक पहाड़ में मिलेगा। सामग्री जो चाहिए वो है, तिमुर के बीज, हरा धनिया और नमक। इसका नमक बकायदा मैंने भूटान में भी एक रेस्टोरेंट में खाया।

ऐसे और भी अनेकों छोटी छोटी बातें हैं पहाड़ की जो कि हर पहाड़ी व्यक्ति के लिए बेहद खास है। खासकर की जब आप पहाड़ से दूर किसी शहर में अपना जीवन व्यतीत कर रहे हों और पहाड़ की हर चीज़ मानो आपको अपने पास वापस बुलाना चाह रही हो।

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